प्रणाम शहीदां नू (शहीदी दिवस )
आज का दिन, वो दिन है जिस दिन अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे भगत सिंह, राजगुरु एवम् सुखदेव को फांसी दी थी। शहीदों को दिल से प्रणाम 🙏।वो तीनों अगर चाहते तो बाकी आम भारतीयों की तरह अपनी जिंदगी जी सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन को न्यौछावर कर के भारत को आजाद कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी वज़ह से हम आज़ाद हैं लेकिन आज़ादी का मूल्य शायद हम भूलते जा रहे हैं, तभी तो आज हम सिर्फ़ अपने बारे में सोचते हैं। देश सेवा या फिर देश भक्ति तो दो-दिन ही याद आती है या फिर यूं कहें याद भी क्या आती है, कुछ देर देशभक्ति के गाने सुनो, भाषण सुनो और हो गई देशभक्ति।
व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना और चलवाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है लेकिन अगर हम ऐसा करेंगे तो शायद कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए कोई तैयार ही नहीं, क्योंकि ऐसा करना तो समय की बर्बादी लगता है। इसलिए कुछ पैसे दे दो और अपना काम करवा लो, यही चलन है और इस चलन के चलते एक मध्यम वर्गीय इंसान जो कि अपनी जरूरत मुश्किल से पूरी कर पाता है, उसे भी पिसना पड़ता है। इसका प्रमाण अगर देखना हो तो सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट हॉस्पिटल के बाहर लगी लाईनें जा कर देखा जा सकता है। कुछ समय पहले मैंने पंजाब के अमृतसर शहर में एक टी-शर्ट देखी थी जिस पर लिखा था "लगदा है फेर आऊंणा पऊ"(लगता है फिर से आना पड़ेगा)।आज के देशवासियों और देशभक्तों को देख कर लगता है कि जैसे भगतसिंह कह रहे हों लगदा है फेर आऊंणा पऊ। प्रणाम शहीदों नू🙏🙏🙏।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें