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शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध उपन्यास "बड़ी दीदी "

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बड़ी दीदी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यासों में से एक है। अपने बचपन की मित्र धीरू की मधुर स्मृतियाँ लेखक के मानस पटल पर लंबे समय तक अंकित रहीं। इन्हीं स्मृतियों के आधार पर उन्होंने देवदास की पारो, श्रीकांत की राजलक्ष्मी और बड़ी दीदी की माधवी जैसे अमर पात्रों की रचना की। यह उपन्यास 1913 में लिखा गया था, जिस पर बाद में फिल्म भी बनाई गई। बड़ी दीदी मूलतः जमींदार सुरेंद्रनाथ के बचपन से लेकर जीवन के अंत तक की करुण कथा है। सुरेंद्रनाथ की माता का देहांत उसके बचपन में ही हो गया था। विमाता ने उसका पालन-पोषण इस प्रकार किया कि वह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं—भूख, प्यास, नींद—तक को समझने में असमर्थ रह गया। फिर भी किसी प्रकार उसने विश्वविद्यालय से एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। मित्रों की प्रेरणा से उसने विलायत जाने की इच्छा प्रकट की, किंतु विमाता के हस्तक्षेप के कारण पिता ने अनुमति नहीं दी। इससे क्षुब्ध होकर सुरेंद्रनाथ एक रात घर छोड़कर कोलकाता चला गया। परिस्थितियाँ उसे माधवी के पिता के घर ले आती हैं। माधवी, जो मात्र सोलह वर्ष की विधवा है, प...

बस तुम ही तुम

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मुंशी प्रेमचंद की कालजई रचना 'निर्मला'

निर्मला – एक स्त्री के मौन दुःख, टूटते विश्वास और बिखरते परिवार की करुण गाथा — कंचन चौहान प्रेमचंद का उपन्यास ‘निर्मला’ हिंदी साहित्य की उन अमर कृतियों में से है, जिसमें समाज का यथार्थ अत्यंत मार्मिक और संवेदनशील रूप में सामने आता है। 1930 के दशक की पृष्ठभूमि में रचा गया यह उपन्यास दहेज, अविश्वास, सामाजिक मर्यादाओं, गलतफ़हमियों और परिस्थिति-जनित त्रासदियों का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कहानी की नायिका निर्मला शांत, मितभाषी और सौम्य स्वभाव की लड़की है। विवाह से ठीक एक माह पूर्व उसके पिता की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। इसी के साथ दहेज-लोलुप वर-पक्ष रिश्ता तोड़ देता है। विवश होकर उसकी मां, बिना दहेज के विवाह हो जाए, इस आशय से उसका विवाह चालीस वर्षीय विधुर मुंशी तोताराम से कर देती है, जिनके पहले विवाह से तीन पुत्र हैं—मंसाराम, जियाराम और सियाराम। निर्मला तोताराम का आदर करती है और उनके बच्चों से स्नेह रखती है, किन्तु पिता के समान आयु वाले पति को स्वीकार करना उसके लिए भीतर ही भीतर पीड़ादायक था। किंतु उसने परिस्थितियों के साथ समझौता कर लिया। त्रासदी की शुरुआत वहाँ से होती है जहाँ मुंशी...