पापा की परी
पापा की परी
पापा मुझको पंख मिले हैं,
मुझको अंबर में उड़ना है,
उड़ने की आजादी दे दो,
मुझे अपना क्षितिज बढ़ाना है।
ऊंची से ऊंची मैं उड़ पाऊं,
अपना आकाश बनाऊं मैं।
बस मुझको एक मौका दे दो,
पापा की परी कहलाऊं मैं।
बिन अनुमति मैं कुछ नहीं करती,
पापा से हर बात मनवाऊं मैं।
ना-ना करते, फिर हां भरते,
पापा हर ज़िद पूरी करते,
पापा की मैं लाडली बेटी,
पापा की परी कहलाऊं मैं।
पापा मुझको पंख मिले हैं,
मुझको अंबर में उड़ने दो,
पढ़ने की मुझे अनुमति दे दो,
आत्मनिर्भर बन जाऊं मैं।
उच्च शिक्षा का मौका दे दो,
मुझको बस ये तोहफा दे दो,
इक नया इतिहास बनाऊं मैं ,
अपने सुंदर पंख फहरा कर,
ऊंचे अंबर में उड़ जाऊं मैं ।
दुनिया को नतमस्तक कर दूं,
पापा का मान बढ़ाऊं मैं।
बस पापा मेरे खुश हो जाएं,
अब ऐसा कुछ कर जाऊं मैं,
पापा की हूं लाडली बेटी
पापा की परी कहलाऊं मैं।
कंचन चौहान, बीकानेर
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