बारिश
बारिश
काले
-काले बादल आए,
संग
अपने है बारिश लाए।
बारिश
की वो बूंद सुहानी,
जब मिट्टी को गले लगातीं हैं,
मिट्टी से मिल कर वो बूंदे,
धरा पर सौंधी खुशबू फैलातीं हैं।
काले
बादल उमड़ - घुमड़ कर,
धरती
पर अपना प्यार लुटाते हैं,
बारिश की फिर बूंदें बन वो,
वसुधा को गले लगाते हैं।
बूंदें फिर बौछारें बन कर,
धरती
की प्यास बुझातीं हैं।
बारिश
की वो सुहावनी बूंदें,
सब
पर रंग दिखलाती हैं,
मौसम तब बदले धरा पर,
नया
रंग चढ़ जाता सब पर,
हरियाली छाए वसुधा पर,
मन की
कलियां खिल जातीं हैं।
वृक्षों
का हर पत्ता - पता,
बारिश
में धुल जाता है।
बारिश
के पानी में नहा कर,
सब
बच्चे,बूढ़े और जवान,
जीवन
का आनन्द उठाते हैं।
बारिश
के पानी में कुछ पल,
हर
ग़म को भूल वो जातें हैं,
बारिश
का पानी सावन में,
सबके
मन को लुभाता है,
क्यों
कि ये वो बारिश है,
जो
कृषकों के मन भाती है।
गर्मी
से राहत मिलती सब को,
और
धरा हरी-भरी हो जाती है।
कंचन
चौहान, बीकानेर
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