कुछ सीखो चिड़िया रानी से
कुछ सीखो चिड़िया रानी से
सुबह
सुबह जब चिड़िया रानी चूं चूं, चीं चीं करती है,
मीठी
प्यारी बोली उसकी, सबमें नयी ऊर्जा भरती है।
चिड़िया
रानी फुदक-फुदक कर दाना-पानी चुगती है,
नन्ही
सी ये प्यारी चिड़िया मेहनत करना सिखलाती है।
खुद
ये दाना चुगती और बच्चों को अपने खिलाती है।
नन्ही
सी ये प्यारी चिड़िया हमें क्या क्या पाठ पढ़ाती है,
सुबह
-सवेरे जल्दी उठकर काम पर अपने जाती है।
बच्चों
को ये पाल पोस कर इतना उन्हें सिखाती है,
खुद
ही पालन करें वो अपना, ये उनको बतलाती है।
उड़ना
जब वो सीख हैं जाते,तो स्वतंत्र उन्हें बनाती है,
मोह
माया में नहीं जकड़ती,आजाद उन्हें वो करती है,
कितना
सुन्दर मन है उसका, कुछ सीखो चिड़िया रानी से।
हे
मानव तूं कितना उलझा, जीवन की मोह माया में,
तेरे
बच्चे हर पल देखें, मुंह तेरी धन - माया का।
हे
मानव तूं क्यूं ना सीखे , नन्ही प्यारी चिड़िया से,
बच्चों
को बनाओ आत्मनिर्भर,मत जकड़ो जंजीरों से,
खुद
पर अपने करो भरोसा,आस रखो बस ईश्वर से।
मीठी
प्यारी बोली बोलो,नव ऊर्जा का संचार करो,
अच्छे
कर्म करो इस जग में और भव सागर को पार करो।
कंचन
चौहान, बीकानेर
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें