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अक्षय तृतीया

    अक्षय तृतीया  आखा तीज का पर्व पुराना, क्यूं हमने इसे माना है, क्या इसकी है कथा कहानी, क्या हमने इसे जाना है। बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की,  तृतीया तिथि,अक्षय तृतीया कहलाती है। दान, पुण्य और जप- तप सारे, अक्षुण्ण हो जातें हैं। इस दिन की महिमा सारे, शास्त्र और वेद सुनाते हैं। इस दिन की महिमा है भारी, बतलाते हैं बारंबारी, विष्णु जी के छठे अवतार, परशुराम जी का जन्म हुआ था इस दिन  और गंगा मैया उतरीं धरती पर, धोएं पाप जिसमें नर - नारी। कहते हैं केशव ने इस दिन, अक्षय पात्र कृष्णा को देकर, हर ली उसकी चिंता भारी। दान धर्म और व्रत,जप तप करते, विशेष रूप से सब नर - नारी। अक्षय तृतीया का पावन दिन, शुभ मुहूर्त कहलाता है, इस दिन किए कर्म सारे, अक्षुण्य हो जातें हैं। सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक, पावन पर्व अक्षय तृतीया, शुभ मुहूर्त कहलाता है, इस दिन किए कर्म सारे, स्वतः ही सिद्ध हो जाते हैं, इसीलिए, इस दिन की महिमा, सारे वेद और पुराण गाते हैं। कंचन चौहान, बीकानेर 

अटल सच्चाई

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प्रिय स्त्री

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लघुकथा: घूंघट

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         “ घूंघट “ मैं टैक्सी में बैठी अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। दूर सड़क के किनारे एक महिला अपने एक हाथ में दूध की बरनी लटकाए हुए और दूसरे हाथ से बार - बार अपने घूंघट को खींच रही थी। शायद सड़क पार करने का इंतजार कर रही थी। देखने में वह महिला अधेड़ उम्र से थोड़ा ज्यादा ही लग रही थी।उसे देख मुझे ख्याल आया कि घूंघट की ओट तो छोड़ो, शायद इस उम्र में कुदरती आंखों से भी कम दिखना आम बात होगी।उसी उधेड़बुन में टैक्सी उसे पीछे छोड़ आगे निकल गयी और मैं अपने काम में व्यस्त हो गई। अगले दिन अखबार में एक कोने में छपी खबर ने मुझे झकझोर दिया। ख़बर थी, "तेज रफ़्तार ट्रक ने अधेड़ महिला को कुचला, अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज"। मुझे बार-बार सड़क किनारे घूंघट में खड़ी महिला का ध्यान आ रहा था। कंचन चौहान, बीकानेर

म, तेरा जाना

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नयी शुरुआत

नयी शुरूआत  हर दिन एक नया दिन हैं, हर पल नया - नया सा है। कुछ नहीं बिगड़ा, सब कुछ सही है, सांसें जब तक साथ में है। थोड़ा रुको, विचार करो, आत्म विष्लेषण अपने आप करो। गलती गुनाह नहीं होती है,सीखो, और फिर नयी शुरुआत करो। ना शिकवा - गिला, शिकायत करो, ना इल्जाम किसी दूजे पर धरो। अपने हिस्से का संघर्ष करो, हर दिन है नया, नयी शुरूआत करो। बस मन चाही उड़ान भरो, जो देखे हैं सपने, साकार करो। कल चाहे, कठिन समय था, जो बीत गया, सो बीत गया। अंधियारे के बाद उजाला है, हर रात का अंत सवेरा है। जीवन के कड़वे अनुभव से, सीखो और नयी शुरूआत करो। ईश्वर का उपहार है जीवन, नये सफर का आगाज करो। कंचन चौहान, बीकानेर