मां शहीदों का रखना

 आज़ाद देश में रहते हैं हम,आज़ादी हम को प्यारी है। लेकिन क्या मालूम है सबको,इस आज़ादी पर कितनों ने, जाने वारीं है। एक नज़र शहादत पर रखकर, तुम मान शहीदों का रखना, देश मेरा सबसे पहले और पीछे सारे अहम् रखना। दो सौ साल झेली गुलामी,पग - पग पर अपमान सहा, गौरों ने राज किया भारत पर, और हमको गुलाम कहा। सब कुछ छीन लिया हमसे, और अनपढ़, ग्वार कहा। क्या -कया बयां करुं तुम से, गौरों ने कितना जुल्म किया। जान की कोई कीमत ना थी, जब चाहा जिसे मार दिया। जलियांवाला बाग की घटना , आज भी दिल दहलाती है राजगुरु, सुखदेव,भगतसिंह की फांसी याद अभी भी आती है। सुभाष चंद्र, आज़ाद, तिलक और लालाजी के नारे आज भी, हमें आज़ादी के दीवानों की याद दिलाते हैं। आज़ादी नहीं मिली मुफ्त में, कितना कुछ हमने खोया है, गुलामी की कालिख को, वीरों ने रक्त से धोया है। कितनी मांगें उजड़ीं और कितनों ने लाल को खोया है। वीरांगनाओं की गाथा क्या गाऊं, नतमस्तक, निःशब्द हूं मैं। लेकिन आज़ादी की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं मैं। खून से सनी मिली है आज़ादी , इतना याद सदा रखना, बनकर पहरेदार देश के, मान शहीदों का रखना। देश मेरा सबसे पहले और पीछे सारे अहम् रखना।

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