दीपोत्सव
🌟 दीपोत्सव 🌟
✍️ कंचन चौहान, बीकानेर
अपने संग-संग लेकर आती,
कितने उत्सव — दीपोत्सव, दिवाली।
दीपों का त्योहार मनाते,
मन में सब कितना हर्षाते।
पंचोत्सव से सजी दीवाली,
हर घर को महकाती है।
दीवाली वो रोशन रात है,
जो अमावस के तम को मिटाती है।
धनतेरस से शुरू होकर,
भाई दूज तक जाती है।
रूप चौदस है छोटी दीवाली,
दीपावली, गोवर्धन पूजा — धन-धान्य बरसाती है।
पंचोत्सव से सजी दीवाली,
कोना-कोना सजाती है।
राम अयोध्या आए इस दिन,
संग में सीता, लक्ष्मण और —
कितने मेहमान लाए थे।
कार्तिक मास की अमावस्या को,
राम बनवास काट, अयोध्या आए थे।
राम के स्वागत में जले दीप,
आज भी अमावस का अंधकार मिटाते हैं।
दीपोत्सव का पर्व तभी से,
दीपावली कहलाता है।
माता लक्ष्मी की पूजा कर,
मन धन-धान्य की कामना करता है।
राम-राम का पर्व दिलों में,
प्यार और उल्लास से भरता है।
भाई दूज का तिलक लगाकर,
बहनें भाई के मंगल की कामना करती हैं।
पंचोत्सव — दीपावली सबको,
प्यारा संदेश ये देती है —
जीवन में भले हो घनघोर अंधेरा,
उम्मीद का एक दीपक जीवन को,
फिर से रोशन कर देता है।
दीपावली के दीपक जैसे,
अमावस के तम को हरते हैं।
जीवन से अंधकार मिटाने,
आओ हम सब मिलकर,
दिल में दीपों को रोशन करते हैं।
गणेश, लक्ष्मी और माँ सरस्वती के संग,
सब देवों का स्वागत करते हैं।
मन के दीप जलाकर हम सब,
दीपोत्सव का आनन्द मनाते हैं।
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