इंसान



इंसान

ईश्वर की सबसे प्यारी कृति है इंसान,
दिल और दिमाग दिया है बेमिसाल।
सोचने और समझने की शक्ति देकर,
ईश्वर ने रचाया है अद्भुत इंसान।

अपनी रचना देख मुस्कुराया भगवान,
कैसी सुंदर, सर्वश्रेष्ठ कृति है इंसान।

ईश्वर की सबसे प्यारी कृति हूं,
यही सोच बड़ा इतराया इंसान।
ईश्वर के हाथों में है डोर सबकी,
ईश्वर का रूप भूल बैठा इंसान।

धोखा, द्वेष, लालसा और वासना,
से भरमाया, राह भूल बैठा इंसान।
इंसान का रूप देख चकराया भगवान,
इतनी प्यारी कृति, कैसे बन गयी विकृति।
यही सोच धरती पर खुद आया भगवान।

अब तो जरा सोचो, हे प्यारे इंसान,
कहां गए संस्कार और सिद्धांत,
जिन्हें मूल में रखकर
भगवान ने बनाया होगा प्यारा इंसान।

स्वरचित 
कंचन चौहान, बीकानेर

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