मां -पिता

कितने रिश्ते हैं दुनिया में,
पर मां -पिता सा रिश्ता एक नहीं।
इनके रहते कोई फ़िक्र नहीं दुनियादारी का,
खुद का सोचो और ऐश करो,
कोई जिक्र नहीं जिम्मेदारी का।
हंस कर या फिर गुस्सा होकर,
हर जिद्द ये पूरी करते हैं।
देख दुःखी बच्चों को अपने,
हर बात को मान ही जाते हैं।
इनके संघर्षों को समझना,
सबके  बस की बात नहीं ।
ग़लत भले औलाद हो कितना,
पल में माफ़ मां -पिता करें।
नाराज़गी चाहे कितनी भी हो,
पर औलाद का दुःख ये सह ना सकें।
बच्चों को ही दुनिया मानें,
उनके लिए सौ दुःख सहे।
अपनी कोई फ़िक्र नहीं इनको,
बच्चों के लिए ही हर पल जिएं।
बच्चों का जीवन सुगम,सुखद हो,
यही कोशिश हर वक्त करें।
पात्र बदलते हैं दुनिया में,
किरदार हमेशा वही रहे।
मां -पिता सा रिश्ता जीवन में,
कोई और नहीं कभी हो सकता।
औलाद वहीं खुशकिस्मत हैं जो,समय रहते ये समझ सके,
मां -पिता सा रिश्ता जीवन में, कोई और निभा नहीं पाता है।
इनके जैसे बच्चे के मन को, कोई और समझ नहीं पाता है
समय पर जो ना ये समझे,वो फिर पीछे पछताता है।

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